शिक्षा का दर्शन और तोत्तोचान / जितेन्द्र यादव
शिक्षा का दर्शन और तोत्तोचान
बाल मनोविज्ञान पर आधारित यह पुस्तक
वैसे तो जापान के सामाजिक ,सांस्कृतिक परिवेश से सम्बन्ध रखती है .लेकिन अपनी विषयवस्तु के कारण यह
पुस्तक सार्वभौमिक बन जाती है ,लेखिका तेत्सुको कुरोयानागी ने खुद अपने जीवन में बीती आपबीती को ही कथात्मक
रूप में घटनाओ को प्रस्तुत किया है
इस पुस्तक की यात्रा वहाँ से शुरू होती है जब तोत्तोचान को अपने पहले स्कूल से इस लिए निकाल दिया जाता कि वह अत्यधिक चंचल लड़की है कई सारे जिज्ञासा के कारण अपने शिक्षिका से सवाल करती रहती है .ये सब उस शिक्षिका को अच्छा नही लगता है इसीलिए तोत्तोचान की माँ को बुलाकर कह देती है कि ये लड़की इस स्कूल में नही पढ़ सकती .तब तोत्तोचान की माँ उसको बिना बताये चिंतामग्न हो कर तोमोये में कोबायाशी के स्कूल में प्रवेश के लिए ले जाती है .तोत्तोचान अब भी अपनी माँ के साथ चलती हुई काफी चंचल रहती है लेकिन उसकी माँ अंदर -2 गम में डूबी रहती है उसको भय रहता है कि यदि यहा भी प्रवेश नही मिला तो वह फिर क्या करेगी.
इस पुस्तक की यात्रा वहाँ से शुरू होती है जब तोत्तोचान को अपने पहले स्कूल से इस लिए निकाल दिया जाता कि वह अत्यधिक चंचल लड़की है कई सारे जिज्ञासा के कारण अपने शिक्षिका से सवाल करती रहती है .ये सब उस शिक्षिका को अच्छा नही लगता है इसीलिए तोत्तोचान की माँ को बुलाकर कह देती है कि ये लड़की इस स्कूल में नही पढ़ सकती .तब तोत्तोचान की माँ उसको बिना बताये चिंतामग्न हो कर तोमोये में कोबायाशी के स्कूल में प्रवेश के लिए ले जाती है .तोत्तोचान अब भी अपनी माँ के साथ चलती हुई काफी चंचल रहती है लेकिन उसकी माँ अंदर -2 गम में डूबी रहती है उसको भय रहता है कि यदि यहा भी प्रवेश नही मिला तो वह फिर क्या करेगी.
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तोत्तोचान जब अपने नये स्कूल को देखती है
तो आश्चर्य चकित हो जाती है क्योकि स्कूल की जगह रेल का पुराना डिब्बा था उसी में
क्लास चलता था .फिर वे दोनों हेडमास्टर यहा गये हेडमास्टर से तोत्तोचान पहली बार
में ही पूछती है की आप हेडमास्टर है या स्टेशन मास्टर ,सुनकर उसकी माँ घबरा जाती है लेकिन हेडमास्टर
हस देते है फिर तोत्तोचान को अपने बारे में बोलने के लिए कहते वो पूरा तीन घंटा
बोलती रहती है उसको बाद में पता चलता है मैंने इतना घंटा बोल बोल दिया .हेड मास्टर
ने कहा कि अब तुम इस स्कूल की छात्रा हो .
तोत्तोचान बहुत खुश थी वो जब भी स्कूल
से जाती तो माँ से जरुर चर्चा करती उसको बहुत बेचैनी रहती की कब सुबह हो और स्कूल
जाऊ .उसके घर में एक कुत्ता भी था जिसका नाम राकी था जिससे वह बहुत स्नेह करती
थी.तोमोये में श्री कोबायाशी बच्चों से घनिष्ठ सम्बन्ध रखते थे बच्चों के हर एक
क्रिया कलाप पर ध्यान देते थे उनसे खाने में समुन्द्र और पर्वत की चीज लाने के लिए
कहते थे जिसका मतलब मछली और साग सब्जी होता था ,कोबायाशी बच्चों के हर जिज्ञासा को शांत कर
देना चाहते थे .एक बार स्कूल में रेल का नया डब्बा आने वाला होता हैं बच्चे हैरान
रहते है आखिर यहाँ कैसे रेल का डिब्बा आएगा कोबायाशी ने उनकी जिज्ञाषा को शांत
करने के लिए रात में यही आने के लिए कहते है सभी बच्चे रात में तोमोये में बैठकर
रेल की डिब्बा का इंतजार करते है .रेल का डिब्बा जब टेलर से आता है तो सारे बच्चे
देखकर स्तब्ध रह जाते है.
तोमोये में हमेशा कुछ न कुछ नया होता
रहता है जो बच्चों को हमेशा अलग अनुभव कराता है .तरुण ताल में तैरने के लिए बच्चों
को प्रेरित करते है वह भी बिना कपड़ा के सब बड़े आनंद के साथ तैरते है .इसी तरह एक
बार उन्होंने भूत वाला खेल खेलने के लिए कहते है पूछते है कौन -2 भूत बनेगा 7 बच्चे हाथ उठाते है और सभी कब्रगाह में जाकर
छिप रहते है लेकिन वहा तक कोई नही जाता है
कोबायाशी गर्म सोते की भी शैर कराते है जिसमे बच्चों को बहुत सी येसी चीज देखने को
मिलती हैजिसका पहली बार वे अनुभव ले रहे होते है जैसे की नावं कैसे बनती है सोते
कैसे होते है इत्यादि .एक बार तोत्तोचान माँ और पिता के साथ मेले में जाती है वहां
चुज्जे देखती है और उसको बहुत प्यारा लगता है उसको खरीदने के लिए माँ और पिता से
जिद करने लगती है और अंतत: खरीदना पड़ता है हालाकि बाद में बच्चा मर भी जाता है उसे
काफी दुःख भी होता है .कोबायाशी बच्चों को स्कूल में सबसे खराब कपड़े पहनकर आने को
कहते है ताकि खेलने कूदने में फट भी जाये तो कोई बात न हो .तोत्तोचान के स्कूल में
ताहाकाशी नाम का बिकलांग बच्चा भी पढ़ने आता है जिससे तोत्तोचान की सहानुभूति और
मदद दोनों होती है .एक बार तोत्तोचान नरम चीज समझकर कठोर प्लास्टर पर कूद जाती है
तभी उसके मास्टर कहते है कूदने से पहले देखो . इसी तरह एक बार अपने घर के कुत्ते
राकी से खेल रही होती है तभी अचानक उसके कान को काट लेता है वे अपने कान से ज्यादा
राकी को लेकर चिंतित हो जाती है कि यदि माँ या पिता जान जायेंगे कि राकी ने काटा
है तो हो सकता है उसको घर से निकाल दे .उन लोगो को वचनवद्ध करके की राकी को कुछ
नही करेंगे तब बताती है कि राकी ने काटा है.
एक बार तोत्तोचान स्कूल से घर आ
रही होती है तभी रेल में गिरा हुआ सिक्का दिख जाता है लेकिन लेने का साहस नहीं
होता है कई तरह के विचार मन में चल रहे होते है कोई देख ले और चोर न कह दे अंत में
सिक्के को धीरे से उठा लेती है और सोचती है इसको कल स्कूल में दे दूंगा .उसको
रास्ते में एक पथ्थर के निचे गाड देती है और सुबह जब देखती है तो पैसा गायब रहता है
यह उसके लिए रहस्य ही रह जाता है .तोत्तोचान एक दिन बालों की चोटी बनाकर जाती है
और सोचती है कि अब मै बड़ी दिख रही हू सभी छात्र मेरा अदब करेंगे लेकिन होता इसका
उल्टा है एक छात्र तो उसके चोटी का मजाक ही बना देता है पकड़कर खीचने लगता है और वह
गिर जाती है उसकी चोटी भी बिगड़ जाती है रोते हुए हेडमास्टर के पास जाती है
हेडमास्टर उस लड़के को बाद में नैतिकपूर्ण तरीके से समझाते है .एक बार अध्यापिका
मानव विकास समझा रही होती है तभी बंदर का जिक्र आता है कि पहले आदमी के पास भी इसी
तरह पूछ थे और मजाक में एक लड़के से पूछती है कि क्या तुम्हारे पास भी पूछ है लड़का
गंभीर हो जाता है सभी बच्चे हसने लगते है. इस बात को कोबायाशी सुन लेते है
अध्यापिका को अपने कमरे में बुलाकर गलती महसूस कराते है.
एक दिन हेडमास्टर ने खेती करने वाले
किसान को खेती के बारे में बच्चों से अनुभव बाटने तथा बच्चों को खुद खेत में ले
जाकर जानकारी के लिए अपने स्कूल में बुलाते है और बताते है. ये तुम्हारे टीचर है
पहले तो बच्चे सोच में पड़ जाते है लेकिन बाद में खेत में जाकर बकायदा अनुभव
प्राप्त करते है .कोबायाशी कभी भी तोत्तोचान को निराश नही करते है वे कहते है तुम
सच में एक अच्छी बच्ची हो . तोत्तोचान अपने मौसी से रिबन मागी रहती है जो उसके लिए
बहुत खुबसूरत था अपने बालो में लगाकर जाती है उसके रिबन को देखकर कोबायाशी की बेटी
भी इसी तरह के रिबन की मांग करती है वे बाजार में उसको बहुत खोजते है लेकिन नही
मिलता है .बाद में तोत्तोचान को बुलाकर रिबन न लगाकर स्कूल आने के लिए कहते है वे
मान जाती है तोत्तोचान युद्ध में घायल सैनिक से मिलने के लिए अस्पताल जाती है वहा
वे गीत सुनाना चाहती है लेकिन गा नही पाती है उसको देखकर एक सैनिक बहुत भावुक हो
जाता है .वे स्नेह पूर्वक उससे मिलती है और विदा होती है.
तोमोये में अमेरिका से अंग्रेजी बोलने
वाला बच्चा पढ़ने के लिए आता है .कोबायाशी उससे अंग्रेजी सिखने तथा उसको जापानी
सिखाने के लिए बच्चों को प्रेरित करते है .तोत्तोचान पहली बार नाटक देखती है और
उसमे नाच रही नृत्यांगना से प्रभावित होकर अपनी माँ से नृत्यांगना बनने के लिए
कहती है .एक दिन स्कूल जब खुला तो उस
हेडमास्टर बहुत दुखी थे जेब में हाथ डालकर चुपचाप खड़े थे बाद में बताया कि
यासुकी चान नहीं रहा .तोत्तोचान बहुत दुखी हुई वह सोचने लगी जब पहली बार उससे मिली
थी तो कितना अच्छा लगा था .फिर उन्होंने कहा हम उसको दफनाने के लिए ले चलेंगे.
जब पहली बार तोत्तोचान टिकट मास्टर से
मिली थी तो उसने सोचा टिकट मास्टर बनूँगी .बाद में नृत्यांगना बनने के लिए सोचती
है लेकिन अब वे जासूस बनने के लिए अपने साथी से कहती है जो कहता है जासूस बनने के
लिए सुंदर महिला होना तथा कई भाषाओ को जानना जरुरी होता है .जब द्वितीय विश्वयुद्ध
अपने जोरो पर होता है हर जगह तवाही मच रहती
है भोजन की समस्या हो जाती है.तभी उसके पिता से कोई कहता है यदि गोला बारूद
की फैक्टरी में वायलिन बजाकर देशभक्ति प्रेम जगायेंगे तो खाने का व्यवस्था हो सकता
है लेकिन उन्होंने अस्वीकार कर दिया वे अपनी प्रतिभा का इस्तमाल येसी चीजो के लिए
नही कर सकते .एक दिन जब तोत्तोचान अपने ताउजी के यहा से लौटती है तो अपने माँ
से राकी के बारे में पूछती है .जिसका जवाब
माँ देने में घबराती है वह सोचती है क्या बोलू दुखी मन से कहती है कि वह कई दिनों
से दिखाई नही दे रहा है .तोत्तोचान जान जाती है की अब राकी नही लौटेगा वह उदास हो
जाती है.
युद्ध की भयावह स्थिति चल रही थी .एक दिन
ऐसा भी आया जब बम तोमोये के स्कूल पर भी
गिरा दिया वह जल रहा था .तब कोबायाशी दूर खड़े रास्ते पर से देख रहे थे और अपने
बेटे से पूछा अब हमारा स्कूल कैसा होना चाहिए .वह आश्चर्य से कोबायाशी की तरफ देखा
.स्कूल जल रहे थे लेकिन कोबायाशी के सपने नही टूटे थे वह नये स्कूल की कल्पना कर
रहे थे.
इस तरह देखा जाय तो तोत्तोचान पुस्तक आज
की शिक्षा व्यवस्था के सामने एक मिशाल पेश करती है .हमारी ज्वलंत समस्या के सामने
एक राह भी दिखाती है जिससे बहुत कुछ प्रेरणा लेकर हम प्राथमिक पाठशाला में बदलाव
की शरुआत कर सकते है .ये निरंतर शिक्षा और शिक्षाविदों के लिए प्रासंगिक रहेगी.
लेखक.जितेन्द्र
यादव

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