शिक्षा का दर्शन और समरहिल / जितेन्द्र यादव
शिक्षा का दर्शन और समरहिल बहुचर्चित “ समरहिल ” पुस्तक इंग्लैंड के शिक्षाविद व समरहिल स्कूल के संस्थापक ए.एस .नील की है . इन्होंने विभिन्न देशों में शिक्षण किया और अपने अनुभव से शिक्षा के व्यापक पहलू को देखा और तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था से असंतुष्ट होकर शिक्षा में बदलाव की भावना से प्रेरित होकर अपनी पत्नी फ्रा न्युस्तेटर के साथ मिलकर एक ऐसा स्कूल बनाने का फैसला किया . जो उनके अनुरूप हो बच्चे जैसे है वैसे ही होकर जी सके . 1921 में जर्मनी में शुरू होने के बाद समरहिल नाम का स्कूल अंतत:लन्दन के पास एक गाँव में सन 1923 में स्थापित हुआ और आज तक बना हुआ है . इसमें 5 से 15 वर्ष कि आयु के लगभग 40 -50 बच्चे हमेशा रहते है यह पूरी तरह आवासी स्कूल रहा है और इसका मूलमंत्र है - स्वतंत्रता . स्वतंत्रता पर दो तरह के अंकुश भी है – एक , बच्चों की सुरक्षा के लिए जरुरी समझे गए नियम और दू...
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