मरे हुए लोग और जिन्दा सवाल
- Get link
- X
- Other Apps
"मरे हुए लोग और जिन्दा सवाल "
उसके दादा नहीं थे किसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर
उसकी माँ नहीं है डॉक्टर
पिता नहीं है इंजीनियर
उसके पास नहीं है कई जोड़े चमचमाते ड्रेस और टाई
वह स्कूल बस नहीं बल्कि खेत की पगडण्डीयों से भागता आता है
वह अपने पीढ़ी का पहला बच्चा है जो
लांघ रहा है स्कूल का चौखट
पीठ पर लादे हुए दादा ,परदादा और बाप के मरे हुए सपने
कि शायद अब जिन्दा हो जाये ,
लेकीन तुम कहते हो आ रहा है
केवल खिचड़ी खा रहा है ,
वह नहीं मागता है भाषा केवल अक्षर समझना चाहता है
लेकिन तुम नाकाम होते जा रहे हो
तोहमत पर तोहमत उस पर मढ़ते जा रहे हो ,
काश कि तुम देख पाते उसके बेबस बाप के आंख में तैरते सपने
और माँ के पढ़ पाते पीले चेहरे
तो आप बन जाते भीगी बिल्ली ,
मैं सिर्फ उसके दर्द को शब्दों में बता रहा हूँ
आप सोचोगे कि मैं आग भड़का रहा हूँ - जितेन्द्र कबीर ( मेरे आक्रोश से)
उसके दादा नहीं थे किसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर
उसकी माँ नहीं है डॉक्टर
पिता नहीं है इंजीनियर
उसके पास नहीं है कई जोड़े चमचमाते ड्रेस और टाई
वह स्कूल बस नहीं बल्कि खेत की पगडण्डीयों से भागता आता है
वह अपने पीढ़ी का पहला बच्चा है जो
लांघ रहा है स्कूल का चौखट
पीठ पर लादे हुए दादा ,परदादा और बाप के मरे हुए सपने
कि शायद अब जिन्दा हो जाये ,
लेकीन तुम कहते हो आ रहा है
केवल खिचड़ी खा रहा है ,
वह नहीं मागता है भाषा केवल अक्षर समझना चाहता है
लेकिन तुम नाकाम होते जा रहे हो
तोहमत पर तोहमत उस पर मढ़ते जा रहे हो ,
काश कि तुम देख पाते उसके बेबस बाप के आंख में तैरते सपने
और माँ के पढ़ पाते पीले चेहरे
तो आप बन जाते भीगी बिल्ली ,
मैं सिर्फ उसके दर्द को शब्दों में बता रहा हूँ
आप सोचोगे कि मैं आग भड़का रहा हूँ - जितेन्द्र कबीर ( मेरे आक्रोश से)
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment